Eye Care

देव नन्दिनी नेत्र चिकित्सालय

मोतियाबिंद

आँख के लेंस का धुंधला या अपारदर्शी हो जाना मोतियाबिन्द कहलाता है | उतरोतर दृष्टि का धूमिल होते जाना अथवा आँखों में चौंध लगना इसके प्रमुख लक्षण है |

 

हमारी आँख के अन्दर पुतली के पीछे एक लेंस होता है | सामान्य आँख में यह लेंस एक दम साफ़ पारदर्शी होता है | इसका कार्य आँख में आने वाली रौशनी किरणों को आँख के भीतर दृष्टिपटल (Retina) पर केन्द्रित करना होता है, जहाँ से दृष्टिपटल पर बनने वाले चित्र को दृष्टिनाडी द्वारा मस्तिष्क को भेजा जाता है | इस प्रक्रिया द्वारा हम देख पाते हैं |

आँख में मोतियाबिंद के विकास के साथ यह लेंस धुंधला होता चला जाता है जिससे दृष्टिपटल पर जाने वाली रौशनी बाधित होती है और उस पर बनने वाला चित्र मन्द और निष्प्रभ बनता है जिससे हम साफ़-साफ़ नहीं देख पाते हैं | मोतियाबिंद पनपने की दर धीमी होती है जिससे मनुष्य की दृष्टि उतरोत्तर धूमिल होती जाती है | 

मोतियाबिंद के ऑपरेशन में इस अपारदर्शी हो चुके लेंस को निकाल कर उसके स्थान पर नया पारदर्शी लेंस प्रत्यारोपित कर दिया जाता है |

ग्लूकोमा

ग्लूकोमा आँख की उस अवस्था का नाम है जिसमे आँख की दृष्टि-नाडी की उतरोत्तर क्षति होती जाती है और यह अंत में पूर्णत: नष्ट हो जाती है | यधपि ग्लूकोमा द्वारा नष्ट दृष्टि पुन: प्राप्त नहीं की जा सकती  तथापि प्रारम्भिक अवस्था में रोग-निदान होने, सजग निगरानी और नियमित चिकित्सा द्वारा आगे होने वाले दृष्टि-नाश को रोका जा सकता है और अधिकाँश रोगियों में जीवन-पर्यन्त सार्थक-दृष्टि बनी रह सकती है |

सामान्यत: इस रोग के कोई पूर्व-चेतावनी संकेत नहीं होते; नियमित आँखों की जांच द्वारा ही इस रोग का प्रारम्भिक अवस्था में पता चल पाता है |ग्लूकोमा पूरे विश्व में अन्धता का एक प्रमुख कारण है | अत: आँखों की नियमित जांच द्वारा ही इसका यथा-समय निदान संभव है | 

मधुमेह दृष्टि-पटल विकृति (Diabetic Retinopathy)   

 

मधुमेह रोगी – विशेषकर वह जो मधुमेह नियंत्रण के प्रति लापरवाह है, जिसके परिणामस्वरूप दीर्घ-काल तक उनमें उच्च रक्त-शर्करा स्तर बना रहता है – दृष्टि-पटल रक्त-वाहिकाओं व् आँख के पीछे की टिशु-लाइनिंग की क्षति से ग्रसित होते हैं जिससे उनमे रौशनी को पहचानने तथा देखने की क्षमता नष्ट हो जाती है |

दृष्टि-पटल पृथकीकरण (Retinal Detachment)

 

दृष्टिपटल (Retina) तंत्रिका-कोशिकाओं की एक पतली सतह है जो आँख के भीतर स्थित है | यह कैमरे के फिल्म की भाँती रौशनी के प्रति संवेदनशील होती है और हमें भली-भाँती देखने के लिए इसकी आवश्यकता होती है | दृष्टिपटल में छिद्र होते है ताकि उनके नीचे स्थित तरल द्रव निकल सके | इसी तरल द्रव के कारण दृष्टिपटल अपने नीचे स्थित आधार और पोषक–उतकों से पृथक हो जाता है | छोटी रक्त-वाहिनियों से विटरिअस (Vitreous) – आँख के मध्य में जैली के समान पदार्थ – में रक्त-स्त्राव भी हो सकता है, जिससे दृष्टि में धुंधलापन आ सकता है | सामान्यत: उपयुक्त चिकित्सा के अभाव में दृष्टिपटल का पृथकीकरण प्रभावित आँख में अन्धता उत्पन्न कर देता है |  

Our OPD works on every day from 9 PM to 6 PM. From the time patient walked in to the hospital, he/she is provided with the best guidance and service until he/she walks out of the hospital. Once registered (valid for 1 month) in the reception the patients are worked up by qualified Optometrists, Vision Technicians and other qualified eye care personnel before being taken to Ophthalmologists consultation.

All patients are screened for refractive errors, cataract and glaucoma, along with a through general medical check-up. At completion of necessary examinations in the diagnostic section, patient is taken to the consulting room of Ophthalmologist, who may order further tests like fundus imaging to arrive at the correct diagnosis. Below mentioned facilities are available in OPD:

  • Visual Acuity
  • Tonometer
  • Retinoscopy
  • Direct- and indirect ophthalmoscopy
  • Slitlamp
  • Fundus Camera
  • Applanation tonometry
  • Depending on the findings during examination patients may be sent for minor procedures, or referred for subspecialty consultations to the respective clinics.